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रिलायंस इंडस्ट्रीज की नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में 269 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। हालांकि, यह मुनाफा सालाना आधार पर 9% कम है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी ने 295 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। मुनाफे में आई यह गिरावट नए बिजनेस में निवेश और ऑपरेटिंग खर्चों में बढ़ोतरी के कारण मानी जा रही है। रेवेन्यू में 101% की तेज बढ़त जहां मुनाफे में हल्की गिरावट देखने को मिली, वहीं कंपनी की कुल कमाई (रेवेन्यू) में जबरदस्त उछाल आया है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जियो फाइनेंशियल का रेवेन्यू 101% बढ़कर 901 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी की कमाई 449 करोड़ रुपये थी। यह तेजी दिखाती है कि कंपनी का बिजनेस तेजी से फैल रहा है और नए सेगमेंट से आय बढ़ रही है। एसेट अंडर मैनेजमेंट में मजबूती कंपनी की मैनेजमेंट के तहत कुल संपत्ति यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तिमाही दर तिमाही आधार पर AUM 29% बढ़कर 19,049 करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जियो फाइनेंशियल अपने लेंडिंग और इन्वेस्टमेंट बिजनेस का तेजी से विस्तार कर रही है और ग्राहकों का भरोसा बढ़ रहा है। लोन बिजनेस में तेज ग्रोथ जियो फाइनेंशियल की लेंडिंग यूनिट जियो क्रेडिट ने इस तिमाही में 8,615 करोड़ रुपये के लोन डिस्बर्स किए। यह आंकड़ा सालाना आधार पर लगभग दो गुना है। NBFC यूनिट का AUM साल दर साल 4.5 गुना बढ़ा है। लेंडिंग बिजनेस से कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम 166% बढ़कर 165 करोड़ रुपये हो गई, जबकि प्री-प्रोविजनिंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट 130% बढ़कर 99 करोड़ रुपये रहा। इससे साफ है कि कंपनी का कोर लोन बिजनेस मजबूत हो रहा है। ऑपरेटिंग बिजनेस की बढ़ती हिस्सेदारी दिसंबर तिमाही के नतीजों में एक अहम बात यह रही कि कंपनी की इनकम में ऑपरेटिंग बिजनेस की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इस तिमाही में कंसॉलिडेटेड नेट इनकम में कोर बिजनेस की हिस्सेदारी 55% रही, जो सालाना आधार पर 20% की ग्रोथ को दिखाती है। यह जियो फाइनेंशियल के बिजनेस मॉडल के मजबूत होने का संकेत है। जियो पेमेंट्स बैंक और डिजिटल ट्रांजैक्शन में उछाल डिजिटल पेमेंट सेगमेंट में भी कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। जियो पेमेंट सॉल्यूशंस का ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग वॉल्यूम सालाना आधार पर 2.6 गुना बढ़कर 16,315 करोड़ रुपये हो गया। ग्रॉस फीस और कमीशन इनकम 4.6 गुना उछलकर 96 करोड़ रुपये पहुंच गई।
वहीं, जियो पेमेंट्स बैंक की कुल इनकम 10 गुना बढ़कर 61 करोड़ रुपये हो गई है। बैंक में जमा राशि 94% बढ़कर 507 करोड़ रुपये हो गई, जबकि ग्राहकों की संख्या बढ़कर 32 लाख हो चुकी है। जियो-ब्लैकरॉक एएमसी में निवेशकों की दिलचस्पी जियो फाइनेंशियल और ब्लैकरॉक के जॉइंट वेंचर के जरिए एसेट मैनेजमेंट बिजनेस भी तेजी से बढ़ा है। जियो-ब्लैकरॉक एएमसी का AUM 14,972 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें 10 फंड शामिल हैं। इस बिजनेस में 10 लाख से ज्यादा रिटेल निवेशक जुड़ चुके हैं। खास बात यह है कि निवेश का बड़ा हिस्सा टॉप 30 शहरों से बाहर के क्षेत्रों से आया है, जिससे नए और पहली बार निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या बढ़ी है। शेयर परफॉर्मेंस और कंपनी का इतिहास शेयर बाजार में जियो फाइनेंशियल का प्रदर्शन फिलहाल दबाव में रहा है। कंपनी का शेयर हाल ही में 287.30 रुपये पर बंद हुआ। बीते 5 दिन में 1.58%, एक महीने में 4.11% और 6 महीने में 10% की गिरावट आई है। हालांकि, एक साल में शेयर 5.47% चढ़ा है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब 1.83 लाख करोड़ रुपये है।
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की स्थापना 22 जुलाई 1999 को रिलायंस स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के रूप में हुई थी। जुलाई 2023 में कंपनी का नाम बदलकर जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड कर दिया गया।
निष्कर्ष कुल मिलाकर, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने Q3 में रेवेन्यू, AUM, लेंडिंग और डिजिटल पेमेंट बिजनेस में मजबूत ग्रोथ दिखाई है। हालांकि, बढ़ते निवेश और खर्चों के कारण मुनाफे पर थोड़ा दबाव दिखा है। आने वाले समय में कंपनी की रणनीति और ऑपरेटिंग बिजनेस की बढ़ती हिस्सेदारी इसके प्रदर्शन को नई दिशा दे सकती है। Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं।